You are here
Home > Latest news > स्वराज की बात करने वाली आम आदमी पार्टी का अपना स्वराज अरविन्द केजरीवाल के चरणों में !!

स्वराज की बात करने वाली आम आदमी पार्टी का अपना स्वराज अरविन्द केजरीवाल के चरणों में !!

0Shares

साल 2011 में इंडिया अगेंस्ट करप्सन के बैनर तले तत्कालीन मनमोहन सिंह सरकार के खिलाफ आरोप लगाते हुये एक बड़ा आंदोलन खड़ा किया गया । लोगो को भ्रस्टाचार से लड़ने के लिए एकजुट किया गया और फिर एक 70 साल के समाजसेवी अन्ना हज़ारे के नेतृत्व में एक बहुत ही व्यापक और पुरे देश में जनलोकपाल आंदोलन हुआ । इस पुरे आंदोलन का मकसद सत्ता में बैठे लोगो को जनता के प्रति जबाबदेह बनाना था । यह पूरा आंदोलन अन्ना हज़ारे और अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में चला । बहुत से लोगो ने अपनी नौकरी छोड़कर इस आंदोलन के साथ जुड़ गये। कुछ दिनों में ही ये आंदोलन पूरी तरह से बिखर गया और इसी के साथ लोगो की उम्मीदे भी बिखर गयी ।

अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में 26 नवंबर 2012 को आम आदमी पार्टी का गठन हुआ। पार्टी बनाते समय लोगो से वादा किया गया की ये पार्टी स्वराज के रास्ते पर चलेगी, पार्टी पारदर्शिता और जनलोकपाल के मुद्दे पर अटल रहेगी । कार्यकर्ता ही पार्टी के मालिक होंगे । पार्टी के सभी फैसलों में जनता की राय ली जाएगी । पार्टी के सभी फैसले जनमत संग्रह पर होंगे । जनता भी परम्परागत राजनीती से थक चुकी थी और उन्होंने दिल खोलकर आम आदमी पार्टी का स्वागत किया की ये पार्टी कुछ नया करेंगी । लेकिन कुछ ही सालो में ये पार्टी भी भारत की और पार्टीयो के तरह से हो गयी है ।

स्वराज और लोकतंत्र की बड़ी बड़ी बातें करने वाले अरविन्द केजरीवाल खुद की पार्टी में स्वराज को पूरी तरह से कुचल दिया है। जनलोकपाल की बात करने वाले अरविन्द केजरीवाल अपने ही पार्टी के लोकपाल एडमिरल रामदास को बहार का रास्ता दिखा चुके है । अपने लोगो पर आरोप लगने पर लोकपाल को ही बहार कर दिये और अभी तक किसी को लोकपाल नहीं बनाया गया है ।

आज आम आदमी पार्टी पूरी तरह से यस सर वाली पार्टी बन गयी है । वन मैन कल्चर पूरी तरह से हॉबी हो चूका है। पार्टी के सभी फैसले अरविन्द केजरीवाल अकेले ही कर रहे है । तीन लोगो की तिकड़ी आज पूरी पार्टी चला रही है । पार्टी में अपने खिलाफ उठने वाले सभी लोगो को पार्टी से बहार का रास्ता दिखा दिया गया है । पार्टी के सस्थापक सदस्य पूर्व कानून मंत्री शांति भूषण जिन्होंने पार्टी फण्ड में सबसे पहले 1 करोड़ का चंदा दिया था । अरविन्द केजरीवाल ने उनको भी साइड लाइन कर दिया ।

पार्टी के सस्थापक सदस्य और सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव जो अरविन्द केजरीवाल के फैसलों पर सवाल खड़ा किया उनको पार्टी के अधिवेशन तक में नहीं आने दिया गया और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल बताकर बाहर कर दिया गया । मयंक गाँधी, प्रोफेसर आनंद कुमार, कपिल मिश्रा, शाज़िया इल्मी, अंजलि दमानिया, संतोष हेगड़े और जिसने भी पार्टी में अपनी आवाज़ उठाने की कोशिश की सबको पार्टी से बहार कर दिया गया ।

आम आदमी पार्टी में अरविन्द केजरीवाल के बाद कोई सबसे बड़ा चेहरा है तो वो कुमार विश्वास है । लेकिन अब आम आदमी पार्टी में वो कितने दिन रह पाते है ये भी आने वाले दिनों में साफ़ हो जाएगा। पार्टी में अपने ही लोगो पर साज़िश और आरोप प्रत्यारोप का दौर चल रहा है ।

इसी महीने दिल्ली के तीन राज्यसभा सीटे खाली हो रही है । आप के तीन सदस्यों का राज्यसभा जाना तय है। आज जो लड़ाई है इन्ही राज्यसभा के सीटों के लिए है । आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास भी राज्यसभा जाने की इच्छा जाता चुके है । लेकिन पार्टी में अरविन्द केजरीवाल के लोग कुमार विश्वास पर लगातार बीजेपी के एजेंट होने का आरोप लगाते रहे है । कुमार विश्वास जो कई बार मंचो से आम आदमी पार्टी और केजरीवाल सरकार की आलोचना भी कर चुके है । पार्टी में जिसने भी अरविन्द केजरीवाल का विरोध किया उसे बहार का रास्ता दिखा दिया गया है । ऐसे में कुमार विश्वास का भी पार्टी में बना रहना मुश्किल नज़र आ रहा है । लेकिन कुमार विश्वास दूसरे संस्थापक सदस्यों की तरह नहीं है इनके पास भी लोगो का अच्छा खासा समर्थन है । लोग इनके कविताओं के दीवाने है, लोगो में इनकी पकड़ मजबूत है ऐसे में कुमार विश्वास का पार्टी से जाना एक बड़ा नुकसान साबित हो सकता है।

आम आदमी पार्टी अपने तीन राज्यसभा सीटों के लिए एक पर अरविन्द केजरीवाल के खास संजय सिंह का नाम लगभग तय कर चुकी है बाकि दोनों सीटों के लिए दो उद्योगपतियों के नामो पर चर्चा चल रही है । अरविन्द केजरीवाल पार्टी में अपने समक्ष किसी और नेता को नहीं देखना चाहते है । इसके लिए शायद कुमार विश्वास के पर कतरे जा रहे है । क्युकी कुमार विश्वास में भी लोगो तक पहुंचने की क्षमता है । अब आने वाले दिनों में कुमार विश्वास क्या करते है ये देखना दिलचस्प होगा ।

Top