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गुजरात चुनाव परिणाम : जबरदस्त रोमांचक मुकाबले में भाजपा ने गुजरात और हिमांचल प्रदेश जीता

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जिस चुनाव परिणाम का लोगो को बेसब्री से इन्तजार था, आज जनता का फैसला आ गया है । लोगो ने दोनों प्रदेशो में भाजपा नेतृत्व पर भरोशा जताया है । कांग्रेस अब एक और राज्य में सत्ता से बाहर हो गयी है । हिमांचल प्रदेश में भाजपा ने एकतरफा तरीके से जीत दर्ज की है । वीरभद्र सिंह के सरकार पर लगे घोटालो के आरोप और हिमांचल के हर 5 सालो में सत्ता परिवर्तन का ट्रेंड जनता ने बरकरार रखा है ।

बात करते है हाई प्रोफाइल और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात की जो प्रधामंत्री जी और भाजपा के लिए नाक का चुनाव बन गया था । जिस गुजरात मॉडल को बेचकर नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री की कुर्सी पर काबिज़ हुए थे । जिसके विकाश की बड़ी बड़ी बाते की गयी उसी गुजरात में आज बीजेपी को कांग्रेस से कड़ी टक्कर मिली । हालाँकि भाजपा गुजरात में 99 सीटों के साथ एक बार फिरसे सरकार बनायेगी लेकिन इसबार बीजेपी को पिछली बार से 17 सीटें कम मिली है । पिछले 22 सालो में कांग्रेस पहली बार गुजरात में चुनाव लड़ते हुए नज़र आ रही थी और उसका परिणाम भी दिखा, कांग्रेस जो 60 सीटों से 80 तक पहुँच गयी है । लेकिन जमीनी स्तर कार्यकर्त्ता और सही इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं होने के कारण कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है ।

आज सुबह जैसे ही मतगड़ना शुरू हुयी, कांग्रेस और भाजपा में कड़ी टक्कर देखने को हमें मिल । कभी भाजपा आगे तो कभी कांग्रेस आगे हो रही थी । लेकिन जैसे – जैसे मतगड़ना होते गयी स्थिति साफ़ होती गयी और अंत में भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बना ली ।

भाजपा के खिलाफ जबरदस्त गुस्सा था

भाजपा के 22 सालो के सत्ता के खिलाफ भी लोगो में भारी असंतोष था । नोटबंदी और फिर GST से लोगो में जबरदस्त गुस्सा था । गुजरात में ज्यादातर लोग व्यापार करते है, और उनको नोटबंदी और GST से बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है । व्यापार में भारी दिक्क्तों का सामना करना पड़ा । सूरत जहा सबसे ज्यादे हिरे का व्यापर होता है, हज़ारो लोग इससे जुड़े हुए है वहा भी GST को लेकर बड़ा विरोध हुआ था । लेकिन कांग्रेस इन विरोधो और गुस्से को वोट में नहीं तब्दील कर पायी और या लोग कांग्रेस को भरोशे के लायक नहीं समझ रहे है ।

जातीय समीकरण और मोदी ब्रांड

गुजरात में पिछले 2 सालो से कई जातीय आंदोलन हो रहे थे, जिससे भाजपा बैकफुट पर थी इस चुनाव में । हार्दिक पटेल के नेतृत्व में पाटीदार अमानत आंदोलन, अल्पेश ठाकोर ने नेतृत्व में OBC, एजुकेशन और शराब बंदी को लेकर आंदोलन चल रहा था । ऊना कांड के बाद एक दलित नेता के रूप में जिग्नेश मेवानी का उभार हुवा । इन सभी लोगो ने मिलकर भाजपा को हराने के लिए दिन रात एक किये हुए थे । लेकिन पटेल बहुल क्षेत्रो में भाजपा की ये जीत साबित करती है की हार्दिक के आंदोलन के बाद भी पाटीदार वोट बीजेपी को ही गये है ।

आने वाली चुनौतियां

भाजपा राज्य में सरकार बना रही है लेकिन आनेवाले दिनों में उसको कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा क्युकी नरेंद्र मोदी राज्य से बाहर है । जनता में जो जनाक्रोश है व्याप्त है । उसके लिए लोगो की दिक़्क़तों को दूर करना होगा । पाटीदार आंदोलन और पानी की समस्या, स्वस्थ सम्बंधी सुविधाये, शिक्षा पर बहुत ज्यादा ध्यान देना होगा इस बार की गुजरात सरकार को ।

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