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पारस मणि से पत्थर बनने की तरफ कदम बढ़ाता उत्तर प्रदेश

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एक साल के प्रोबेशन पीरियड को खत्म करके यूपी सरकार ने सरकारी भर्तियों में पाँच साल का कॉन्ट्रेक्ट सिस्टम राष्ट्रवाद और नैतिकता की चाशनी में लपेट कर लागू करने का प्रयास किया है। पारस मणि से हर चीज को सोना बनाने की कहानियाँ तो लोगो ने पढ़ी हैं पर आने वाला समय इस मणि को पुनः साधारण पत्थर बनते भी लोग देखेंगे।
यूपी में सरकारी नौकरियों का उत्साह जबरदस्त तरीके से हावी है। यह बात यँहा पला बढ़ा कोई भी बता सकता है। अब हर कोई आईएइस आइपीएस तो बन नहीं सकता। सरकारी तंत्र का ढांचा ही बाबू से लेकर समीक्षा अधिकारी तक चलता है। कांस्टेबल से लेकर दरोगा तक दौड़ता है और फिर सरकार के नए आयामों में संचारित होकर दम तोड़ देता है। यूपीट्रिपलएससी जैसा ढांचा जिसमें प्रदेश सरकार के सारे मंत्रायल और डिपार्टमेंट में भर्तियां होती हैं, पिछले कुछ सालों से उसका क्या हाल है आप देख ही सकते हैं।
मुख्यमंत्री जी ने आते ही एन्टी रोमियो स्कॉड बनवाया बहुत बढ़िया काम किया पर ज्यादा दिन टिक न सका। फिर नामकरण किया बहुत अच्छा किया,पर बदला कुछ भी नहीं। फिर जब शिक्षक भर्ती के लिए धरना दे रहे छात्रों को लाठियों से पीटा, जूनियर असिस्टेंट वाले अभ्यर्थी भी पिटे गए। रिजल्ट मांगता और नौकरी माँगता हर बेरोजगार को घसीटा गया कभी न्यायालय में तो कभी सड़को पर दरोगा ट्रेनिंग करके घर बैठे हैं।
और फिर भी माननीय योगी जी कहते हैं नौकरियों की कमी नहीं, योग्य कुशल लोग नहीं हैं। 70 साल के मोदी जी सबको 30 साल की सर्विस या 55 साल में रिटायर करने की शुरुवात कर दिए हैं। उनके अनुसार असमर्थ लोग निकाल दिए जाने चाहिए,तो उनके छोटे शागिर्द ने उनसे 2 कदम आगे चलते हुए अपने यँहा 50 साल में ही रिटायर करने का प्लान बना लिया खैर।
इसे हिपोक्रेसी नहीं कहते, मनमानी नहीं कहते, सनक नहीं कहते। ये सब एक योजना है। अमीर और अमीर हो रहे और गरीब खत्म हो रहे गरीबी खत्म करने के प्रसास में। पिछले छः साल में रोजगार की भट्ठी जल के राख हो चुकी है।
आईटी सेल वाले भी समझने लगे हैं ये गरियाने वाला रोजगार ज्यादा दिन नहीं टिकने वाला। और इमसें अलाउंसेस भी नहीं कोई, मृतक आश्रित में भी कोई स्कोप नहीं। आज एक खबर ने न जाने कितने बेरोजगारों के हौसले को तोड़ दिया। तैयारी करें भी तो किस उम्मीद में? पांच साल संविदा में मजदूरी करने की खातिर? पांच साल के सांसद/विधायक के कार्यकाल को आप संविदा पर घोषित क्यों नहीं करते देश हित मे? फिजूल के भत्ते क्यों नहीं बंद करते? उसपर चर्चा करना व्यर्थ है। इस सरकार ने बेरोजगारों के लिए रास्ते बंद कर दिये हैं। आपका विरोध आपका प्रदर्शन कोई नहीं कवर करने वाला। यँहा तक कि सोशल मीडिया भी नहीं।
आप मनाइए मोदी जी का जन्मदिन बेरोजगार दिवस के रूप मे पर उससे कुछ नहीं बदलने वाला। आपकी मूल अधिकारों को छीन लिया जाएगा।

इलाहाबाद जाइये, जाकर देखिये लड़कों को, 2 हजार रुपये महीने में खर्च चला के पढ़ाई कर रहे, तैयारी कर रहे, संघर्ष कर रहे। ट्यूशन पढ़ा के गुजारा चला रहे है। एक आस में कई कभी तो अच्छे दिन आयेंगे लेकिन आप तो पकौड़े तलने को, ट्यूशन को भी रोजगार मानते हैं तो बात अलग है वरना इन लड़कों की शक्ल देखिएगा आप। इनके आंखों में टूटती उम्मीदे देखिएगा। कइयों के घर की इकलौती उम्मीद हैं ये और आप इन्हें भी ख़त्म करने का फरमान जारी कर रहे। पांच साल संविदा और फिर परफॉमेंस के नाम पर आप क्या दर्शाना चाहते हैं।
खैर ये प्रस्ताव अगर पारित हुआ तो न जाने कितने ख्वाब खत्म हो जाएंगे,कितनी लाशों के जिम्मेदार सिर्फ आप होंगे महाराज जी। गंगा पुल से कितने छात्र कूद कर जान दे देते हैं ये कोई एजेंसी नहीं बताएगी आपको। कितने छात्र नौकरियों की बाट जोहते जोहते कुंवारे रह जाते है कितने की उम्मीदें टूट जाती है शायद ही कोई संस्था ऐसे आंकड़े जुटाती होगी।
आप रामराज्य लाना चाहते थे मगर रामराज्य सिर्फ राम मंदिर बनाने से नहीं आता, उनके बंदरों की भी रोजी रोटी का प्रबंध करना पड़ता है।खैर आपको क्या,आपको बस
राजनीति करनी है। अम्बानी अडानी वाला ताना पुराना हो चुका है। 20 लाख करोड़ में जितने शून्य होते हैं वो जनता को बाट दिये गए, आगे वाला दो रिलाइंस ग्रुप अमेज़ॉन के साथ डील करके हासिल कर रहा।

नया निज़ाम,नई बंदिशें, ऐलान नया
हम फक़त लश्कर ए शाही के ही माफ़िक़ सोचें
साहिब ए वक़्त ने ये हुक्म किया है जारी
अपने नस्लों से कह दो मेरे मुताबिक़ सोचें…।

जय मोदी!
जय योगी!

~मृत्युञ्जय तिवारी

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