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क्या आर्थिक किल्लत से झूझती कांग्रेस पार कर पाएंगी गुजरात का महासमर ??

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भाजपा के लगातार २२ सालो के शासन के खिलाफ उठ रही सत्ता विरोधी लहर को कांग्रेस साध पाने में सफल हो पायेगी । ये सवाल लोगो के मन में लगातार कौंध रहा है, जबकि कांग्रेस खुद आजकल आर्थिक संक्रमण के दौर से गुजर रही है। कांग्रेस के कारपोरेट फंड में २०१२ से लगातार कमी आ रही है।

कांग्रेस को २०१२ से लेकर २०१६ बस २०० करोड़ का ही कारपोरेट चंदा मिला वही इसी दरमियान भाजपा को ७५० करोड़ का धन कारपोरेट चंदे के रूप में मिला। आज के परिवेश में जहा चुनाव बस पैसे का खेल होकर रह गया है वैसे हालात में कांग्रेस के लिए पैसे की कमी गुजरात में भारी पड़ सकती है. लगातार कई राज्यों में चुनाव लड़ने और हारने के वजह से कांग्रेस के पास रिसोर्सेज की कमी पड़ गयी है। कांग्रेस ने अपनी सभी उमीदवारो से कह दिया है की वो अपने पैसे से चुनाव लड़े ।

Rahul gandhi
Image Credit : Google Images

पिछले एक साल के अंतराल में कांग्रेस को गोवा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मणिपुर में हार का सामना करना पड़ा है, कांग्रेस पार्टी को एक बड़ी जीत बस पंजाब में नसीब हुयी है। आजकल पार्टी का पूरा ध्यान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात पे है, बहुत सालो बाद गुजरात में कांग्रेस फुल कॉन्फिडेंस से लड़ने के साथ जीत का दावा भी कर रही है ।

गुजरात में पिछले २ सालो से लगातार कई जातीय आंदोलन हो रहे है , जिसमे सबसे बड़ा आंदोलन हार्दिक पटेल के नेतृत्व में पाटीदार आंदोलन हो रहा है। पाटीदार वोटर कभी बीजेपी के कोर वोटर हुआ करते थे लकिन आजकल उनमे भाजपा को लेकर कुछ नाराजगी है, खासकर युवाओ में जिन्होंने पुरे गुजरात में जबरदस्त आंदोलन किया मुख्यतः उत्तर गुजरात में जहा पाटीदार काफी मजबूत और निर्णायक भमिका में है. इसी प्रकार अल्पेश ठाकोर और जिग्नेश मेवाणी के नेतृत्व में पिछडो और दलितों को लेकर एक आंदोलन हुआ ।

कांग्रेस ऊपरी तौर पे तो तीनो युवा नेतावो को साधने की कोशिश कर रही है लेकिन धरातल पे परिस्थिति अलग है इन तीनो जातियों में काफी अंतर्विरोध है। जिनका एक साथ आना बहुत मुश्किल है। इसको लेकर कांग्रेस के माथे पे पसीना आना स्वाभाविक है. अल्पेश ठाकोर ने जंहा कांग्रेस ज्वाइन कर लिया है और हार्दिक पटेल कोंग्रस को समर्थन देने की घोषणा कर चुके है वंही जिग्नेश मेवाणी ने अभी तक किसी के समर्थन का ऐलान नहीं किया है.

राहुल गाँधी के लगातार दौरों से गुजरात कांग्रेस पुरे जोश और कॉन्फिडेंस से चुनाव मैदान में है , अब देखना ये है की क्या कांग्रेस इस उत्साह को कितने सीटों में तब्दील कर पाती है।

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