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गुजरात चुनाव : क्या भाजपा गुजरात में फस गयी है ???

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1995 से लगातार 22 सालो से गुजरात के सत्ता पर काबिज़ भाजपा को आपने सबसे मज़बूत गढ़ गुजरात में कांग्रेस से इस बार कड़ी टक्कर मिलती दिख रही है । इस बार कांग्रेस नए फ्लेवर में नज़र आ रही है, और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी गुजरात चुनाव का प्रबंधन अपने हाथो में लिए हुए है । राहुल की रैलियों में जुटती भीड़ और आरक्षण विरोधी आंदोलन से नाराज़ कुछ पटेल वोटर भी कांग्रेस की तरफ जाते दिख रहे है ।

कल शाम को CSDS और ABP न्यूज़ का ओपिनियन पोल आया जिसमे कांटे का मुकाबला दिखाया जा रहा है, और दोनों पार्टियों को 43% – 43% वोट शेयर मिल रहा है और बाकि को 14% वोट शेयर मिल रहा है । CSDS के अगस्त महीने में किये गए ओपिनियन पोल में भाजपा कांग्रेस पे बड़ी बढ़त बनाती दिख रही थी । लेकिन अब स्थिति एकदम बदल चुकी है और मुकाबला 50 – 50 का हो गया है । लेकिन इस सर्वे के अनुसार युवा पाटीदार नेता और आरक्षण विरोधी आंदोलन के अगुआ हार्दिक पटेल की लोकप्रियता में गिरावट हो रही है, जो कांग्रेस और हार्दिक के लिए शुभ संकेत नहीं है ।

भाजपा की तरफ से प्रचार का मोर्चा खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कंधो पे उठा लिया है जो की लगातार पुरे गुजरात में ताबड़तोड़ रैलिया कर रहे जिससे लोगो तक अपनी बात पहुँचा सके । लेकिन इस बार प्रधानमंत्री मोदी की रैलयो में उतनी भीड़ नज़र नहीं आ रही है जो भाजपा के माथे पे पसीना लाने के लिए बहोत है । गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी को अपने विधानसभा राजकोट वेस्ट में कड़ी टक्कर मिल रही है । जातिगत आंदोलन और मोदी जैसे बड़े नेता के अभाव में गुजरात भाजपा में नेतृत्व क्षमता की कमी साफ़ महसूस की जा सकती है ।

गुजरात चुनाव के पहले फेज़ के वोटिंग में अब बस 4 दिन का समय शेष रह गया है । पहले फेज़ के लिए 7 तारीख को प्रचार प्रसार पूरी तरह से थम जाएगा । पिछले 22 सालो से सत्ता से बाहर रही कांग्रेस का बूथ प्रबंधन और पकड़ भाजपा की अपेक्षा बहुत कमजोर है । कांग्रेस को अभी भी जमीनी स्तर पर ये अंतर कम करने के लिए जो समर्पित कार्यकर्ता चाहिए जो अभी नहीं है । भाजपा के पास सर्मपित कार्यकर्ताओ की बड़ी फौज और जमीन पे कार्य करने वाले आरएसएस कार्यकर्ता है जो उसके बूथ प्रबंधन में भाजपा को एज हासिल है, उनके पास अमित शाह जैसा एक कुशल रणनीतकार है जिसके पास लोकसभा से लेकर उत्तर प्रदेश विधान सभा तक का अनुभव है ।

लड़ाई अब कांटे की हो गयी है । अब यंहा जीत उसी की होगी जो अपने वोटर्स को बूथ तक लाने में सफल होगा !!

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