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प्रधानमंत्री पकौड़ा रोजगार गारेंटी योजना की समीक्षा

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भारत वर्ष की जनता कितनी मूढ़ और मंदबुद्धि हैं जो मोदीजी जैसे विश्व के महान चायशास्त्री की बात को समझ ही नही पा रही है। बातो ही बातो में उन्होंने देश के बेरोजगारों को एक नयी दिशा दिखा दिया।

“प्रधानसेवक जी ने एंकर से ही पूछ लिया ‘अगर जी टीवी स्टूडियो के बाहर कोई पकौड़े बेच रहा तो वो रोजगार है कि नहीं?”

दरअसल यह सवाल उस एंकर से नही है, यह सवाल, नोटबन्दी ओर जीएसटी के बाद के धंधे की व्यथा हर ग्राहक को बांचते छोटे बड़े व्यापारी से है,
यह सवाल उन किसानों से है जिनकी फसल खेत मे ही खड़ी रह गयी क्योंकि मंडी में उतने दाम भी नही मिल पा रहे थे जितना फसल कटाई ओर उसे मंडी तक पुहचाने का खर्चा था और जो रोजगार की तलाश में शहरो में चले आये, ये सवाल उन MBA, Phd, Btech, डिग्री धारक बेरोजगार लोगो से हैं जो चपरासी और क्लर्क बनने के लिए लाइनों में लगे पड़े है और कोचिंग क्लास के चक्कर लगा लगा लगा कर उनके जूते घिस गए है, और जिनके पिता जी ना कंही के विधायक है और ना ही बड़े अधिकारी ।

अगर आप पकौड़े तलने को छोटी मोटी चीज समझते है तो दरअसल आप बहुत बड़े मूर्ख व्यक्ति है दरअसल यह मेक इन इंडिया का प्रतिनिधित्व करता है और स्वदेशी को बढ़ावा देता है। यही तो स्टार्टअप योजना स्टैंडअप योजना की बुनियाद है ,पकोड़े तल लेना वह भी ZEE स्टूडियो के बाहर यह महान संकल्पना है यह राष्ट्र गौरव की बात है। ZEE न्यूज़ के बाहर आपका ठेला होने से आपको बैठे बिठाए देशभक्ति का प्रमाण पत्र भी प्राप्त हो जाएगा ।

अब आप जरा गहराई से इस योजना को समझे, स्टूडियो के बाहर पकौड़े का ठेला लगाने की बात एक महान चाय वाला ही कर सकता हैं । मोदी जी बोल रहे थे कि मेरे पास कोई अनुभव नही था मोदीजी गलत बोलते हैं उनके पास चाय बनाने का जो अनुभव था उसी आधार पर उन्होंने पकौड़े का ठेला लगाने की बात कही हैं मनमोहन सिंह होते तो कुछ और बोलते खैर जाने दे ।

अगर आप ध्यान दे तो पाएंगे कि कितनी गहरी सोच है मोदीजी की पकौड़े तलने की बुनियादी जरूरत क्या है ? सबसे पहले तो आपको पकौड़ा तलने के लिए तेल लगेगा और खाद्य तेलों का सबसे बड़ा कामकाज कौन कर रहा है जी हां आप सही समझे अडानी जी, पकौड़े तलने में जो गैस की टंकी लगेगी वो अम्बानी जी देंगे आखिरकार कमर्शियल गैस के वही तो सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता है। बेसन पतंजलि का होगा ओर ऐसे पकौड़े खाने से जब जनता का पेट खराब होगा तो इलाज भी बाबा रामदेव की दवाइयां करेगी।

ऐसा नही है कि मोदीजी को केवल अपने पूंजीपति मित्रो की ही चिंता है पकौड़े के लिए बेसन तो चना दाल से निकलेगा और तेल सरसो से ही ( वो अलग बात है कि कभी कभी वो जनता का भी तेल निकाल देते है ) इसलिए किसान को भी मोदी जी समझा रहे हैं कि भाई अब जरा नकदी फसलों की तरफ ध्यान दो कब तक गेंहू चावल की खेती करो जरा दलहन और तिलहन की खेती पर भी ध्यान दो।

मोदीजी को उन सरकारी कर्मचारियों और नगरपालिका वालो की भी चिंता है जो गाहे बगाहे ठेले खोमचे वालो से वसूली करने पुहंच जाते है, नोटबन्दी के बाद से वे भी बेचारे परेशान थे यह उनके भी भले की योजना है उन्हें भी बंधी बधाई ऊपरी इनकम होती रहेगी । तो आप देखे तो यह मोदी जी की बहुत अद्भुत योजना है । खैर वो चाय का ठेला लगाने के लिए भी कहते लेकिन सोचने लगे कि क्या पता चाय बेच कर आप भी प्रधानमंत्री हो जाय और प्रतिस्पर्धा ज्यादा हो जाय ।

मोदी जी ने बहुत सोच समझ कर पकौड़े तलने की बात की है यह चायनोमिक्स है, यह कौनो इकनॉमिक्स से ऊपर की चीज़ है । हमारे जैसे मंदबुद्धि मूढ़ लोगो के लिए नही है यह गूढ़ ज्ञान है बड़े बड़े बाबा लोग के लिए जो उच्च कोटि के गोवा वाले माल का सेवन करते हैं राहुल बाबा की तरह तब उन्हें ऐसा ज्ञान प्राप्त होता है ।

धन्य हो गया वो ZEE स्टूडियो जहाँ ऐसी ज्ञान गंगा बह निकली और धन्य है वो पत्रकार जो इस कथा के निमित्त बने, धन्य है मोदीजी आप धन्य है
मैं सोच रहा हूँ कि चला जाऊं ZEE स्टूडियो के बाहर पकौड़े का ठेला लगाने, आप चल रहे हैं क्या ?

इस पोस्ट को मृत्युञ्जय तिवारी के द्वारा लिखा गया है । जो प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा ZEE न्यूज़ को दिए गये साक्षत्कार पर व्यंग मात्रहै। न्यूज़एरा ने उनके पोस्ट को बिना किसी काट छांट आपके सामने प्रस्तुत किया है । मृत्युञ्जय से संपर्क करने लिए आप saurabh.deoria123@gmail.com पर लिख सकते है

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