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प्रणाम राष्ट्रनायक….

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आज राष्ट्रनायक महात्मा गांधी जी की जयंती है, आज अगर बापू होते तो 152 वर्ष के हो चुके होते। उनकी मृत्यु के भी 70 साल से ज्यादा हो चुके हैं पर 20वीं शताब्दी में पैदा हुआ वो नायक पूरी दुनिया में आज भी प्रसांगिक है और रहेगा भी। संभवतः आधुनिक समय के सबसे बड़े प्रतीक पुरूष हैं बाबू । लंदन में बैरिस्टर की पढ़ाई करने के उपरांत भी गरीब और शोषित जनता के साथ कदम से कदम मिला कर खड़ा रहना तीन हाथ कपड़ो में पूरा जीवन बिता देना और किसी भी परिस्थिति का सामना करने की दृढ़ इच्छाशक्ति, समाज के आखिरी व्यक्ति की भावनाओं को समझने की कला ही उनको महात्मा बनाती है। बापू से शिकायतों का अंबार हैं हमारे पास, जब वो जीवित थे तब भी था परन्तु वो हमारे लिए श्रेष्ठता और सभ्यता के मानक हैं एक आदर्श जननेता के तौर पर सपनें में हम सिर्फ उन्हें देखते हैं। हमें तब भी उनसे उम्मीदें थी आज भी हैं। कभी-कभी लगता है कि वो फिर आयेंगे और देश की सभी परेशानियों को खत्म कर देंगे। आप उनके विरोधी हों या उनके समर्थक आप उन्हें नजरअंदाज नहीं कर सकते। ये शायद उनकी सबसे बड़ी खासियत है। गांधी जी पर बहुत कुछ लिखा गया है और बहुत कुछ लिखा जायेगा पर मार्क्स आये, लेनिन, स्टालिन, माओ, चर्चिल, कास्त्रो, लूथर और चे ग्वेरा जैसा सशस्त्र विद्रोही भी आया और चले गए पर इन्ही के साथ आया एक आदमी जिसने चे ग्वेरा को भी प्रभावित किया, लूथर को भी प्रभावित किया तथा सुदूर अफ्रीका में मंडेला उनको अपना आदर्श मानते थे। चे से भारत आने पर पूछा गया कि आपने सशस्त्र क्रांति क्यों कि तो चे ग्वेरा का जवाब था कि ‘हमारे पास गांधी नहीं थे।’ कभी सोचा है कि गांधी इतने प्रसांगिक क्यों रहे और आज भी हैं और रहेंगे भी। उनका मूल्याकंन करने लायक तो मैं नहीं हूं फिर भी गांधी वो हैं जो अफ्रीका में भारतीयों के लिए लड़ते हैं उनका नैतिक आधार बहुत विराट है।
भारतीयता का उनसे अच्छा रक्षण शायद किसी ने किया हो.. अंग्रेज खुद को सभ्य कहते थे गांधी ने कहा नहीं तुम असभ्य हो आखिर इतने बर्बर लोग सभ्य कैसे हो सकते हैं ? सभ्य तो हम हैं जो चुपचाप तुम्हारी बर्बरता सहते हैं। अंग्रेजी के कारण जब भारतीयों में हीन भावना का विकास हुआ तो गांधी ने हिंदी का नारा दिया। वो अंग्रेजो से भी उनका कुशल क्षेम पूछते थे और अंग्रेज भी जब दवाब सहन नहीं कर पाते दौड़ कर उनके पास ही जाते थे। लाख दुर्व्यवहार के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों से घृणा नहीं की अपितु प्रेम ही दिखाया उनके प्रति। गांधी ने हमें प्रेम करना सिखाया और सभ्य बनाया। भारतीयों का अहम रक्षण उनसे बेहतर किसी ने नहीं किया और उन्हें आत्मसम्मान से खड़ा होना सिखाया। दुनिया के सबसे बड़े साम्राज्य को सदियों के शोषण से दबी हुई जनता ने घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। ये आत्मबल उनमें गांधी ने भरा था कि हमारी आत्मा ज्यादा पवित्र है और हम किसी से भी लड़ और जीत सकते हैं। दो राष्ट्र एक साथ खड़े हुए एक भारत और एक पाकिस्तान। एक ने सत्याग्रह से आजादी ली और दूसरे ने सीधी कार्यवाही से ज़बरदस्ती एक देश बनवाया। सत्याग्रह वाला देश शान से खड़ा है और सीधी कार्यवाही वाले कि हालत आप देख ही रहे हैं ये थे गांधी। चौरी चौरा में थाने को फूंकने के बाद उन्होंने आंदोलन वापस ले लिया पता है क्यों ? गांधी अहिंसा का मूल्य डालना चाहते थे इस देश में। अगर उस समय उन्होंने वो बात मान ली होती तो हममें क्रोध का एक मूल्य पड़ा होता और हम आज भी अपनी बात मनवाने के लिए थाने फूंकते जिसके बदले में आज हम धरना, अनशन, कैंडल मार्च करते हैं। 1942 के आंदोलन में जब लोगों ने हिंसा की तब गांधी से पूछा गया कि ये भी तो हिंसा है पर उन्होंने कहा नहीं ये प्रतिक्रिया है क्योंकि अहिंसक आदमी कभी कायर नहीं होता। एक उदाहरण से कहना चाहूंगा कि अगर रास्ते में किसी के साथ कुछ गलत हो रहा हो तो पहले आप उसे बचायेंगे या सत्याग्रह करेंगे ? निःसंदेह पहले उसे बचायेंगे और 1942 के आंदोलन में यही हुआ था। यही मूल्य डाला था गांधी ने हममें उस आंदोलन को रोककर। सीधी कार्यवाही वाले देश के पास गांधी नहीं थे इसलिए वो इस हालत में है कि हर आवाज को सेना से दबाते हैं। गांधी ने नैतिकता के नए प्रतिमान खड़े किए। गांधी जी कहते थे कि ‘आंख के बदले आंख पूरी दुनिया को अंधा बना सकती है’ सोच के देखियेगा क्या ये सत्य नहीं है ! गाँधी ने हमें सबल बनाया और उपभोग के आगे भी जीवन है ये बताया..वो चरखा सबलता का प्रतीक था और खादी आत्मनिर्भरता की। मेरे एक परिचित कहते हैं कि सबसे बड़ी बात होती है बुराई के खिलाफ आवाज उठाना और गाँधी ने वही किया…
ये विडम्बना ही कही जायेगी कि जीवन भर उपभोक्तावाद का विरोध करने वाले बापू की फ़ोटो हमनें नोट(करेंसी) पर छाप दी और उनके अनुयायियों ने उनको सिर्फ़ मूर्तियों और किताबों तक सीमित कर दिया और वो हमारे आम जनजीवन से दूर होते चले गए। आज जब दुनिया उनके मूल्यों को अपना रही है और संरक्षित कर रही है हमारे अपने देश में उनका क्षरण हो रहा है। आवश्यकता है उनके संरक्षण की क्योंकि वो नैतिक आधार है इस देश का। गांधी इस देश की आत्मा हैं।हे राम कहता हुआ वो व्यक्ति जनमानस की आवाज है। गांधी भी आलोचना से परे नहीं है और उनमें भी कमियां थी जिसे वो खुद मानते थे। बापू पर लिखा जाये तो एक जीवन काफी नही होगा, मैं उस लायक भी नहीं हूं कि उतना लिख सकूं इसलिए और ज्यादा लिखना नही चाहता किंतु अंत मे सिर्फ इतना कहूंगा कि ‘हिंसा से युद्ध जीते जाते हैं और अहिंसा से सम्मान’ गांधी ने पूरी दुनिया में सम्मान जीता।
आज कुछ लोग राजनैतिक लाभ के लिए गांधी के चरित्र और मंशा के बारे मे अफवाहें फैलाते है पर एक बात समझ लीजिए गाँधी से नफरत करके कोई समाज से प्रेम नही कर सकता है । यह बात अगर झूठी होती,तो गाँधी की आंख बंद करते ही करोणों घरों के चूल्हे गम में बुझ न जाते । जाकर देखना,दो तीन पीढ़ी ऊपर,अपने ही घर मे,अपने ही पुरखों को,उन्होंने गाँधी को पलकों पर बैठाया था । वह मूर्ख नही थे,वह देश से प्रेम करते थे,मानवता से प्रेम करते थे और देश-मानवता से प्रेम करने वाला कभी भी गाँधी से नफरत नही कर सकता ।
गाँधी की महत्ता मात्र इतने से ही समझ लीजिए कि आजीवन जिस संगठन ने गांधी के बारे में दुष्प्रचार किया है उस संगठन के सबसे होनहार सपूत भी आज गाँधी के सामने सर झुका कर आये है।

प्रणाम राष्ट्र नायक।

मृत्युञ्जय तिवारी

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