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राजस्थान की घटना को बर्बरता मत कहिए, ये पूरा का पूरा नैरेटिव ही भड़काऊ है।

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पेट्रोल लाए.. लाइटर भी दी.. जलाने को लकड़ी-पुआल भी उपलब्ध करा दिया और अब जब किसी ने इन सब का इस्तेमाल करके आग लगा दी तो छाती पीट कर विधवा विलाप का नाटक क्यों । आग भड़क कर जब तबाही मचाने लगी तो इतना हिम्मत दिखाओ कि आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी लो ।

अब मानो कि सुबह-शाम जो सोशल मीडिया, वॉट्सएप फेसबुक पर जिन ज़हरीली भाषाओं से जो माहौल तैयार किया था उसका नतीजा सामने आने लगा है । मिशन कामयाब हो रहा है तो कम से कम दुखी दिखने का ड्रामा बंद करो । हिम्मत है तो अब आगे बढ़कर मानो कि इस आग की लपटों में इंसानों को जलते देखना ही चाहत थी । आंखें खोल कर अब शरीर से जलकर उतरती खाल देखो.. कान खोलकर जलकर मरनेवालों की चीखें सुनो और ज़ोर ज़ोर से तालियों को पीटो.. अट्टहास करो । अपने संगी साथियों संग इस आग के चारों तरफ नाचते हुए हाथ तापो ।

“इतने से भी मन ना भर रहा हो तो आग भड़काने के लिए घी डालो ।”

“लोगो की मौत को अपवाद सिद्ध करके अपने तैयार किए गए आतंकियों को बचाने की कोशिश करते रहे ।”

पहली बार धार्मिक राष्ट्रवाद की फैक्ट्री से निकले प्रोडक्ट ने अपनी करतूत का बाकायदा वीडियो बनाकर खुद को ही नहीं सबको भी नंगा कर डाला है । वो खुलकर बता रहा है कि हत्या के वक्त उसके ज़हन में क्या था.. ये सब वही बातें तो हैं जो तुम बार-बार यहां लिखते रहे और आपस की बहसों में कहते रहे । लोग चेता रहे थे कि हिंसा को तार्किक आधार मत दो । ये खतरनाक है, लेकिन तुम पर तो नशा सवार था । अब ध्यान से देख लो.. हत्यारे शंभूनाथ की आंखों में जो नशा है वही तो तुम्हारी भाषा और सोच में था ।

इस हत्या का जश्न मनाओ । जिस तालिबान की नृशंसता के वीडियो कुछ साल पहले तक देखने के लिए लोगो को अफगानिस्तान और पाकिस्तान पर निर्भर रहना पड़ता था, अब उसके लिए ये भारतवर्ष आत्मनिर्भर हो गया है । हत्याओं के ये वीडियो ‘मेक इन इंडिया’ हो चुके हैं । ‘न्यू इंडिया’ में ऐसे वीडियो बार-बार दिखेंगे यही डर है, लेकिन रुकना मत । यही सब हो इसके लिए 95 सालों तक नेताओं ने अनथक प्रयास किए हैं । बाकी जो मार नहीं रहे वो सोशल मीडिया पर डिफेंड करने के लिए बैठे ही हैं । कुछ लोग ये सिद्ध करने में लगे है कि जो मारा गया वो पागल था । कुछ बेचारे डिफेंडर खुद को बचाने के लिए उस हत्यारे को मानसिक विछिप्त बता रहे हैं जो उनकी ही लिखी और कही गई बातों को वीडियो में बोल रहा है । मुझे यकीन है कि उन दोनों में से कोई पागल नहीं था लेकिन तुम ज़रूर पागल हो जो खुलकर खेलने के बजाय डर रहे हो ।

पूरे देश में तुम्हारे भी विचारधारा के लोग बैठे हैं । किसी की चिंता मत करो। अब वक्त आ गया है इस तरह की हत्याओं को कानूनी अधिकार दे देने का । कम से कम तुम झूठी निंदा और झूठी कार्यवाहियों से बच जाओगे ।

इस पोस्ट को मृत्युञ्जय तिवारी के द्वारा लिखा गया है । जो आज के परिवेश पर अपने विचार व्यक्त करते हुए अपने दर्द बांया किये है । न्यूज़एरा ने उनके पोस्ट को बिना किसी काट छांट आपके सामने प्रस्तुत किया है । मृतुन्जय से संपर्क करने लिए आप saurabh.deoria123@gmail.com पर लिख सकते है ।

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